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इंटेस्टाइन में लगभग 70% प्रतिरोधक क्षमता होती है- आज के जीवन  में प्रोबायोटिक्स का महत्व

इंटेस्टाइन में लगभग 70% प्रतिरोधक क्षमता होती है- आज के जीवन में प्रोबायोटिक्स का महत्व

बदलते मौसम और सर्दियों की शुरुआत के साथ, हमारी सबसे बड़ी चिंता बीमारियों से बचकर रहना है और सर्दी या फ्लू से बचना है, जो न केवल परेशान करता है, बल्कि छुट्टियों के मौसम का आनंद भी छीनसकता है। ठंड लगने के बाद ज्यादातर लोग विटामिन सी लेने लगते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि यह आपकी प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है। विटामिन सी को white blood cells के उत्पादन को बढ़ाने में सहायक माना जाता है, जो infections से लड़ने में मदद करते हैं। अन्य लोग अपने आहार में बादाम, खट्टे फल, अदरक, लहसुन, गर्म सूप और हरी पत्तेदार सब्जियां शामिल करते हैं, जो प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने और infections के खतरे को कम करने के लिए अच्छे हैं।

ठण्ड से बचाव के इन अनगिनत तरीकों में, हम कैसे भूल सकते हैं की हमारे शरीर की लगभग 70% प्रतिरोधक क्षमता आँतों में होती है। यह अजीब लग सकता है क्योंकि आंत हमेशा पाचन की प्रक्रिया से जुड़ी होती है और शरीर को ऊर्जा प्रदान करती है। लेकिन यह वह अंग भी है जो लगातार बाहरी दुश्मनों के संपर्क में रहता है जैसे बैक्टीरिया, वायरस और अन्य पदार्थ जो बाहरी दुनिया से हमारे शरीर में प्रवेश करता है। इसलिए अधिकतर प्रतिरक्षा कोशिकाएं आपकी आँतों में पाए जाते हैं ताकि वो आपको बीमारियों से बचा सकें।

Protect the Body from Infections

हाल ही में पता चला है कि आंत के बैक्टीरिया और प्रतीक्षा प्रणाली के बीच में गहरासंबंध है और ऐसा प्रतीत होता है कि प्रतिरक्षा प्रणाली अपने विकास के लिए पूरी तरह से फायदेमंद बैक्टीरिया पर निर्भर है। हानिकारक बैक्टीरिया प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर करते हैं और infections के खतरे को बढ़ाते हैं विशेष रूप से वायरल infections जैसे फ्लू, सर्दी और खांसी।यह उन बच्चों और बुजुर्गों में देखा गया है जिनकी प्रतिरक्षा कमजोर है और उन्हें सर्दी, वायरल infections और निमोनिया का खतरा है।

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हाल ही में प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए लोगों ने प्रोबायोटिक खाद्य पदार्थों में रुचिदिखाई है। ये खाद्य पदार्थ आंत में फायदेमंद बैक्टीरिया को बढ़ाते हैं और हानिकारक बीमारी पैदा करने वाले बैक्टीरिया को कम करते हैं। ऐसे खाद्य पदार्थों के लाभों का अध्ययन किया गया है और 2014 में, the British Journal of Nutrition में छपी हुई 20 studies ने दिखाया की प्रोबायोटिक्स लेने से जुकाम में राहत मिलती है। जापान में किए गए अध्ययनों से पता चला है कि याकुल्ट में पाए जाने वाले प्रोबायोटिक बैक्टीरिया – लैक्टोबैसिलस केसी आईस्ट्रेन शिरोटा वास्तव में उन प्राकृतिक किलर सेल की गतिविधि को और Salivary Ig A के स्तर को बढ़ा सकते हैं जिन लोगों में यह कम होते हैं। ये दोनों प्रतिरक्षा कोशिकाएं वायरल infections से लड़ने में बहुत जरुरी हैं।
Balanced Diet

नियमित व्यायाम के साथ, संतुलित आहारऔर गर्म पदार्थों को खाने से आपको सर्दियों का आनंद लेने में मदद मिल सकती है। और रोज़ एक प्रोबायोटिक इसे और भी बेहतर बना सकता है !!!

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